﻿ज़बूर.
134.
ज़ियारत का गीत। आओ, रब की सताइश करो, ऐ रब के तमाम ख़ादिमो जो रात के वक़्त रब के घर में खड़े हो। 
मक़दिस में अपने हाथ उठाकर रब की तमजीद करो! 
रब सिय्यून से तुझे बरकत दे, आसमानो-ज़मीन का ख़ालिक़ तुझे बरकत दे। 
