﻿ज़बूर.
124.
दाऊद का ज़ियारत का गीत। इसराईल कहे, “अगर रब हमारे साथ न होता, 
अगर रब हमारे साथ न होता जब लोग हमारे ख़िलाफ़ उठे 
और आग-बगूला होकर अपना पूरा ग़ुस्सा हम पर उतारा, तो वह हमें ज़िंदा हड़प कर लेते। 
फिर सैलाब हम पर टूट पड़ता, नदी का तेज़ धारा हम पर ग़ालिब आ जाता 
और मुतलातिम पानी हम पर से गुज़र जाता।” 
रब की हम्द हो जिसने हमें उनके दाँतों के हवाले न किया, वरना वह हमें फाड़ खाते। 
हमारी जान उस चिड़िया की तरह छूट गई है जो चिड़ीमार के फंदे से निकलकर उड़ गई है। फंदा टूट गया है, और हम बच निकले हैं। 
रब का नाम, हाँ उसी का नाम हमारा सहारा है जो आसमानो-ज़मीन का ख़ालिक़ है। 
