﻿योना.
2.
तब योना न बड़ी मच्छी को पेट म सी अपनो परमेश्वर यहोवा सी प्रार्थना कर क् कह्यो, 
“मय संकट म पड़्यो हुयो परमेश्वर ख पुकारयो, अऊर ओन मोरी सुन ली हय; मय न मदत लायी अधोलोक को अन्दर सी पुकारयो, अऊर तय न मोरी सुन ली। 
तय न मोख गहरो समुन्दर की गहरायी तक डाल दियो; अऊर मय धारावों को बिचमच पड़्यो होतो, तोरी भड़कायी हुयी सब तरंगें अऊर लहर मोरो ऊपर सी बह गयी। 
तब मय न कह्यो, ‘मय तोरो आगु सी निकाल दियो गयो हय, फिर भी मय तोरो पवित्र मन्दिर ख कसो देखूं?’ 
मय पानी सी यहां तक घिरयो हुयो होतो; की मोरो जीव निकल्यो जात होतो; गहरो समुन्दर मोरो चारयी तरफ होतो, अऊर मोरो मुंड म कायी लपट्यो हुयो होतो। 
मय पहाड़ी की जड़ तक पहुंच गयो होतो; मय हमेशा को लायी जमीन म बन्द भय गयो होतो; फिर भी हे मोरो परमेश्वर यहोवा, तय न मोरो जीव ख गड्डा म सी निकाल्यो हय। 
जब मोरो जीवन खतम होन वालो होतो, तब मय न परमेश्वर ख याद करयो; अऊर मोरी प्रार्थना तोरो जवर बल्की तोरो पवित्र मन्दिर म पहुंच गयी। 
जो लोग बेकार कि चिजों पर मन लगावय हय, हि अपनो अनुग्रह करन वालो परमेश्वर ख छोड़ देवय हय। 
पर मय धन्यवाद को गीत गाय क तोख बलिदान चढ़ाऊं; जो मन्नत मय न मानी, ओख पूरी करूं। उद्धार परमेश्वर सीच होवय हय!” 
तब परमेश्वर न बड़ी मच्छी ख आज्ञा दियो, अऊर ओन योना ख समुन्दर को किनार पर उगल दियो। 
