﻿भजन-संहिता.
95.
आवव, हमन यहोवा बर आनंद के गीत गावन; हमन हमर उद्धार के चट्टान बर जोर से चिचियावन। 
हमन ओकर आघू म धनबाद के संग आवन अऊ बाजा बजाके अऊ गीत गाके ओकर बहुंत परसंसा करन। 
काबरकि यहोवा ह महान परमेसर ए, जम्मो देवतामन ऊपर महान राजा ए। 
ओकर हांथ म धरती के गहरई हवय, अऊ पहाड़ के चोटीमन ओकर अंय। 
समुंदर ह ओकर अय, काबरकि ओह येला बनाय हवय, अऊ ओकर हांथमन सूखा भुइयां ला रचे हवंय। 
आवव, हमन मुड़ नवाके अराधना करन, हमन यहोवा हमर सिरजनहार के आघू म माड़ी टेकन; 
काबरकि ओह हमर परमेसर ए अऊ हमन ओकर चरागन के मनखे अन, अऊ ओकर देखरेख म रहइया एक झुंड अन। यदि आज तुमन सिरिप ओकर ये अवाज ला सुनत हव, 
“त अपन हिरदय ला कठोर झन करव, जइसे तुम्हर पुरखामन मरीबा म करे रिहिन, जइसे कि तुमन ओ दिन सुन्ना जगह के मस्सा म करे रहेव, 
जिहां ओमन मोला परखिन; ओमन मोला जांचिन, हालाकि ओमन मोर काममन ला देखे रिहिन। 
चालीस साल तक मेंह ओ पीढ़ी के मनखेमन ले नराज रहेंव; मेंह कहेंव, ‘येमन अइसे मनखे अंय, जेमन के मन ह एती-ओती होथे, अऊ ओमन मोर रसता ला नइं जानंय।’ 
एकरसेति मेंह कोरोध म कसम खाके कहेंव, ‘ओमन ओ ठऊर म कभू नइं जा सकहीं, जिहां मेंह ओमन ला अराम देवइया रहेंव।’ ” 
