﻿1पतरस.
5.
तुम म जो सियाना हैं, म उन का जसो पुराना अर मसी हुन को दुख हुन ख गवाही अर परगट होन वाली बड़ाई म संग होय ख उन ख यू समझ हैं। 
कि परमेस्वर उ झुंड करी, जो तुमारो बीच म हैं रख वाली कर; अऊर यू दबाव से नी अदि परमेस्वर कि इच्छा को हिसाब से खुसी से, अऊर नीच कमाई को लाने नी पर मन लगा ख। 
जो अदमी हुन तुम ख दियो गयो हैं, उन पर हक नी जताओ, पर झुंड को लाने चोक्खो बन। 
जब प्रधान रख वालो प्ररगट होय, ते तुम ख बड़ाई को मुकुट दियो जाहे ते उ मुरझान को नी। 
यू ही तीरका अरे जवान हुन, तुम भी सियाना जमाना का अदमी हुन का बस म रहो, पर तुम सारा का सारा एक दुसरा कि सेवा का लाने नम्रता से कमर बाँधी रहो, काहेकि “परमेस्वर घमण्डी हुन को विरोध करह आय, जब कि दया करन वालो पर अपनी दया दिखाव हैं।” 
एकोलाने परमेस्वर को ताकत वार हात का नीच नम्रता से रह, जे से उ तुम ख उचित बखत पर उचो करिये। 
अपनी पुरी चिन्ता ओ पर ही डाल दे, काहेकि तुमारो ध्यान हैं। 
होसियार हो, अर जागते रह; काहेकि तुमारो बुरी करन वालो सैतान गर्जन वालो सेर को जसो यू खोज म रह हैं कि कोई ख कब फाड़ खाऐ। 
विस्वास म पक्को होय ख, अर यू जान ख ओको संग लड़ाई कर कि तुमारो भई जो दुनिया म हैं असो ही दुख सहन करिये हैं। 
अदि परमेस्वर जो सारो दया को दाता हैं, जे न तुम ख मसी म अपनी अनन्त बड़ाई का लाने बुलायो हैं, तुमारो थोड़ी देर लक दुख उठान को बाद खुद ही तुम ख सच्चो अर खड़ो अर ताकत वार करेगों। 
उही का समराज हमेसा हमेसा रहे। आमीन 
मी न सिलवानुस को हात, जेना मी विस्वास योग्य भई समझू हैं, छोटो सा म लिख ख तुम ख समझायो हैं, अर यू गवाही दी हैं कि परमेस्वर को सच्चो दया यही आय, यू म खड़ो रहो। 
जो बेबीलोन म तुमारो समान चुनो हुओ अदमी आय, उ अर मोरो पोरिया मरकुस तुम ख नमस्कार कह हैं। 
प्रेम को चुमा से एक दुसरा ख नमस्कार कर। तुम सब ख, जो मसी म हो, सान्ति मिलती रह।
