﻿हितोपदेश.
23.
क्हि शासन लब्मैंने बालु चब् चबर टिमा क्हिए उँइँर थेंबै चबै सै छेनाले ङ्ह्‍योद्। 
क्हि बेल्‍ले चब्ला मुँ बिस्याँ, क्हिए खरिर चक्‍कू थेंन्। 
चए लिंबै चबै सैए लोब आलद्, तलेबिस्याँ छल कपट लसि चबै सै पिंलै खाँम्। 
प्लब् तबर क्हिइ दु:खले के आलद्; ह्रोंसए बुद्धिइ तोइ के आलद्। 
तिस्याँदे ल्हागिर सै न्होर योंम्; दिलेया नुयाम्, तलेबिस्याँ चल प्ह्‍यामैं प्ह्‍यामुँ धै क्रोवे धोंले मुउँइँ प्हुरयाम्। 
सैं आसबै म्हिए चबै सैमैं आचद्, चए लिंबै चबै सैमैंए लोब आलद्, 
तलेबिस्याँ चइ खोंयोंन् बिलै ह्रोंसए खि खैले रेब् ङ्‍हे बिसि मैंरिम्; चइ क्हिने “चद्! थुँन्!” बिलेया चए सैं क्हिए फिर छ्याँब आत! 
क्हिइ च्युगुदे चलैया धबै तेवाब्मुँ, धै क्हिइ चने मान लसि पोंब खेरो ह्‍याम्। 
आमादुने ताँ आसेद्, तलेबिस्याँ क्हिइ पोंबै बुद्धिए ताँमैं चइ आखो। 
स्योंम् ओंनोंबै युँमा क्योबै साँद आस्योद्, टार-टोरमैंए क्‍ल्‍ह्‍यो न्हें आचब्दिद्। 
तलेबिस्याँ चमैंलाइ ल्होमिंबै परमेश्‍वर बेल्‍ले भोंब मुँ; क्हिए बिरोधर खीजी चमैंए मुद्दा नेमिंब्मुँ। 
अर्थिए ताँमैं क्हिए सैंर थेंन्, धै क्हिए न्हइ ज्ञान योंबै ताँमैं छेनाले थेद्। 
कोलोमैंलाइ तार झोंब आपिद्; क्हिइ प्हरेइ प्रिंसि चलाइ सजैं पिंमा च आसि। 
प्हरेइ प्रिंसि चलाइ सजैं पिंन्; छलमा क्हिइ चलाइ नरकउँइँले जोगेब्मुँ। 
ओ ङए च्ह, क्हि बुद्धि मुँब् तइ बिस्याँ, ङए सैं बेल्‍ले तोंब्मुँ। 
क्हिए सुँइ ठिक ताँ पोंमा ङए सैं बेल्‍ले तोंब्मुँ। 
पापिमैं छ्याँब् तब् म्रोंसि क्हिइ ह्रिस आलद्, बरु त्हिंइतिमिन् याहवेहलाइ मान लरिद्। 
छलस्याँ क्ह्रोंसेंन क्हिइ इनाम योंब्मुँ; धै क्हिइ थेंबै आशा तोन् तोर्न तरिब् आरे। 
ओ ङए च्ह, थेद्, धै बुद्धि मुँब तद्, धै क्हिए सैंइ बुद्धिए ताँमैं मैंरिद्। 
प्हाकोमैं नेरो से ल्हे चब्मैंने प्रब टिब आलद्, 
तलेबिस्याँ प्हाकोमैं नेरो चब्लामैं ङ्‍हाँदु तब्मुँ, धै न्हरु ल्हें च्हुइब्मैं थौनि कुसि प्रबर फेब्मुँ। 
क्हिलाइ छ्ह पिंबै आबाइ बिबै ताँ थेद्, धै ह्रोंसए आमा माँब तमा हेल आलद्। 
क्ह्रोंसेंन्बै ताँ किंनु, धै च आचुँन्; सिरसुबास मुँब नेरो ताँ क्होबै म्हि तदु। 
ठिक के लबै म्हिए आबा बेल्‍ले तोंब्मुँ; ह्रोंसए च्ह बुद्धि मुँब् तमा आबा ङ्‍हो लोंब्मुँ। 
क्हिए आबा-आमा ङ्‍हो लोंरिगे; धै क्हिलाइ फिबै आमा बेल्‍ले तोंरिगे। 
ओ ङ‍ए च्ह, क्हिए सैं ङलाइ पिंन्; ङइ लबै केमैं क्हिए मिइ म्रोंरिगे। 
फ्यालुस्यो गैरु होंल्दों ग; फ्रें क्ल्योंप्रबै च्हमिरि रुबै इनार ग। 
च ह्‍यो धोंले क्ह्‍वेसि टिम्, धै म्हिमैंए म्हाँजोर भर लल् आखाँब्मैं ल्हें तल् लब्मुँ। 
खाबलाइ दुःख तम्? खाबलाइ शोक तम्? खाबइ प्होंगि मिम्? खाबइ कच-कच लम्? तोनतोर्न खाब् नेंम्योंम्? खाबए मिमैं को धोंले ओल्ग्या तम्? 
चमैं क्हैन् समा प्हा थुँसि टिरिब्मैंन् कोंबै प्हा म्हैबर ह्‍यारिब्मैं ग। 
चिबै ओल्ग्या प्हा प्हेलर झोंमा पिबि रामुँ, धै चए खुगु तेमा च आङ्ह्‍योद्! 
लिउइ प्हुरिइ धोंले चइ च्हिम्, धै गोमन प्हुरिइ धोंले बिख झोंम्। 
क्हिए मिइ औदिबै सैमैं म्रोंब्मुँ, क्हिए सैंइ तोन् तोर्बै ताँमैं मैंब्मुँ। 
क्हि मा ङ्युँइए फिर रोरिब् धों तब्मुँ, धै क्हि मस्तुलए छोए फिर च्योरिब् धों तब्मुँ। 
“चमैंइ ङलाइ धोंइ दिलेया ङलाइ आन; चमैंइ ङलाइ प्रिंइ दिलेया ङइ थाइ आयों; ङ खोंयों छोरसि धबै प्हा थुँब् ङ्‍हे,” बिसि क्हिइ बिब्मुँ। 
