﻿हितोपदेश.
20.
प्हा ल्हें थुँबै म्हिइ हल्‍ला लसि प्होंगि कैगि लम्, प्हार भुल्दिब्मैं आमादु ग। 
ह्रिस खसि ङ्‍हेबै सिंहने ङ्हिंब् धोंलेन् ह्रिस खबै म्रुँने ङ्हिंन्; म्रुँलाइ ह्रिस खल् लबै म्हि सिल् त्हुम्। 
प्होंगि आमिबै म्हिलाइ ताँनइ खोम्; दिलेया आमादुमैंइ प्होंगि मिबै ताँ लम्। 
प्ल्हेगुइ ठिक त्हेर क्ल्या आक्ल्यो; छतसि बालि खुबै त्हेर चइ तोइ आयों। 
म्हिए सैंर्बै ताँ इनारर्बै क्यु धों ग, दिलेया ताँ क्होबै म्हिइ च ख्योइरि बैरु पखम्। 
ङ खोंयोंइ म्हाँया लम् बिसि ल्हें म्हिमैंइ प्हैंम्, दिलेया भर लल् खाँबै म्हि खाबइ त्होल् खाँमुँ? 
ठिक के लबै म्हि छेनाले छ्ह थोम्, धै चए च्ह-च्हमिमैंइ आशिक योंम्। 
ह्रोंसए राजगद्दिर टिसि निसाफ लमा म्रुँइ आछ्याँबै के लब्मैं ताँन् सेम्। 
“ङए सैं छ्याँब मुँ; ङइ आछ्याँबै केमैं आलइमुँ, ङने पाप आरे,” बिसि खाबइ बिल् खाँमुँ? 
आक्ह्रिबै म्हन पथि नेरो ढकमैं ओलेबै म्हिमैं याहवेहजी आखो! 
कोलोए बानि ब्योरउँइँलेन्, धै चइ खैबै के लइमुँ, च खैबै घ्याँर प्रइमुँ बिसि क्हिइ चए बानि बयोर था सेम्। 
थेबै न्ह नेरो ङ्ह्‍योबै मि, ङ्हिंन-ङ्हिंन् याहवेहजीन् बनेब् ग। 
न्हरु ल्हें आच्हुइद्, आस्याँ क्हि आयोंब-आख्युब् तब्मुँ। जँङ्गर खल्‍ले के लद्, छलस्याँ क्हिलाइ तोइ खाँचो तरिब् आरे। 
समन किंबै म्हिइ “चुम् छ्याँब आरे! छ्याँब आरे!” बिमुँ, दिलेया दे क्याइ फेसि “ङइ बेल्‍ले भाउ कसेसि किंइ!” बिम्। 
मारा, चाँदिमैं ल्हें मुइ फेबै सै मुँन बिलेया, च भन्दा थेब ज्ञान बुद्धिए ताँ पोंबै म्हि ग। 
ङो आसेबै म्हिए जमानि टिबै बुद्धि आरेबै म्हिल क्वें या किंथेंन्; धै फ्रें क्ल्योंप्रबै च्हमिरिए ल्हागिर चइ जमानि टिस्याँ चने मुँबै सैमैं बन्दगिर थेंन्। 
छलु म्हिलु लसि योंबै चबै सै लिंब् ङ्‍हाँम्; दिलेया लिउँइँ चए सुँर च युँमाए फुमैं ङेब् धों तब्मुँ। 
सल्‍ला किंसि चाँजो लद्; सल्‍ला मदो आलल्‍ले ल्हडेंर आह्‍याद्। 
ताँ प्ह्रेबै म्हिइ बिल् आतबै ताँमैं बिप्रम्; छतसि ताँ प्ह्रेप्रबै म्हिने आप्रद्। 
ह्रोंसए आबा आमाए फिर सराप झोंस्याँ क्हिए बत्ति मिछु खैबै त्हेर सैवाब्मुँ। 
आतुरले अँश किंबै म्हिए सै न्होर लिउँइँ तोइ केर आफे। 
“क्हिइ ङए न्होह्रों लइ, छतसि ङज्यै या क्हिए न्होह्रों लम्,” आबिद्; दिलेया याहवेहए फिर भर थेंन्, खीजी क्हिलाइ जोगेमिंब्मुँ। 
आक्ह्रिबै म्हन पथि ढकमैं ओलेबै म्हि याहवेहजी आखो; धै लुबै पारा ओलेबै म्हि म्रोंसे या खी सैं आतों। 
म्हिइ लबै चाजोमैं याहवेहजीन् तोक्दिब् ग। छतसि ह्रोंस प्रबै घ्याँ म्हिइ खैले सेल् खाँब? 
च्हैंब् मैंब् आलल्‍ले परमेश्‍वरए मिंर भक्‍कल लस्याँ लिउँइँ पछुत खल् त्हुम्। 
बुद्धि मुँबै म्रुँइ दुष्‍ट म्हिमैंलाइ प्हुँवाब्मुँ, धै म्ल्ह-नारिमैं नेबै चक्‍कामैं चमैंए फिर दल्दिब्मुँ। 
म्हिए सैं याहवेहए बत्ति ग; च बत्तिइ म्हिए सैंर्बै ताँमैं था सेम्। 
म्रुँइ भर लल् खाँबै के नेरो जनतालाइ म्हाँया लस्याँ खोंयोन् बिले म्रुँ तल् योंम्। 
फ्रेसिमैं भोंमा ताँनइ म्हाँदिम्, खेब्-माँबल क्र सारयमा म्हारब म्रोंम्। 
बेल्‍ले नल्‍ले प्रिंस्याँ आछ्याँबै के लब पिवाम्; छलेन कोर्राइ प्रुमा सैं ख्रुवाम्। 
