﻿हितोपदेश.
8.
बुद्धिइ थेबै कैले हुइरिमुँ! च्हैंब्-मैंब् लल् खाँबै शक्तिइ थेबै कै तेइमुँ! 
घ्याँ रेजरे, घ्याँ त्हुँजे जरे खन्तोदोंन् बुद्धि राम्; 
सहर न्होंर होंबै मुल गेट जरे छ बिदै बुद्धि ओरम्: 
“ओ म्हिमैं, ङ ङाँइ खो, ङइ बिबै बुद्धिए ताँमैं क्हेमैंए ल्हागिर्न ग। 
ओ बुद्धि आरेब्मैं, बुद्धि म्हैद्; ओ आमादुमैं, च्हैंब्-मैंब् लल् खाँब्मैं तद्। 
थेद्, ङइ पोंबै ताँमैं क्हेमैंए ल्हागिर केर फेम्, ङइ ठिक ताँ मत्त्रे पोंम्, 
ङए सुँइ क्ह्रोंसेंन्बै ताँ पोंम्; स्योलिबै ताँमैं ङइ आखो। 
ङइ सुँउँइँ ठिक ताँ मत्त्रे पोंम्, ङइ पोंबै ताँर छलु म्हिलु आत। 
च्हैंब् मैंब् लल् खाँबै म्हिए ल्हागिर च छ्याँब मुँ, ज्ञान मुँबै म्हिए ल्हागिर च ठिक मुँ। 
चाँदि भन्दा ङए अर्ति थेद्, छ्याँबै मारा भन्दा ङए ज्ञान म्हैद्, 
तलेबिस्याँ हिरा-मोति भन्दा बुद्धि ठिक मुँ, क्हिइ म्हैबै छ्याँ-छ्याँबै सैमैं बुद्धिने च्हैंल् आखाँ। 
“ङ बुद्धि ग, ङइ तोंन्दरि सै ह्रइमुँ सेइमुँ, ङने ज्ञान नेरो च्हैंब्-मैंबै शक्‍ति मुँ। 
याहवेहलाइ म्हाँदिब आछ्याँबै के-ति पिब् ग। थेब् प्हैंब, शेखि लब, आछ्याँब् मैंब नेरो स्योलिबै ताँ पोंब्मैंलाइ ङइ आखो। 
छ्याँबै सल्‍ला नेरो ठिक बुद्धि ङउँइँलेन् खम्, ङने क्होल् खाँबै शक्‍ति नेरो भों मुँ। 
ङउँइँले बुद्धि योंसि म्रुँमैइ ग्याल्स लमुँ, धै क्रथे मिथेमैंइ ठिक ठिम बनेम्; 
ङउँइँले बुद्धि योंसि क्रथे मिथेमैं नेरो ह्‍युलर्बै ताँन् थेबै म्हिमैंइ ग्याल्स लम्। 
ङलाइ म्हाँया लब्मैंने ङइ म्हाँया लम्, धै ङलाइ म्हैब्मैंइ ङने त्होब्मुँ। 
मान, इजेत सै न्होर नेरो ठिक के ङने मुँ। 
ङ ङाँइले योंबै बुद्धि छ्याँबै मारा भन्दा या छ्याँब, नेरो चाँदि भन्दा सब मुँ। 
ङ ठिक घ्याँर प्रम्, धै ठिक निसाफ लम्, 
ङलाइ म्हाँया लब्मैंलाइ ङइ ल्हें सै न्होरमैं लमिंब्मुँ, धै चमैंए भकारि प्लिंमिंब्मुँ। 
“याहवेहजी ह्‍युल बनेब् भन्दा ओंसोंन् ङलाइ बनेइ, खीजी बनेबै सैमैं भन्दा ओंसों-ओंनोंन् बुद्धि मुँल। 
पृथ्बी बनेब् भन्दा ओंसोंन्, ङलाइ बनेइ। 
ङ भन्दा ओंसों, मा ङ्युँइ, स्योंमैं तोइ आरेल। 
खीजी क्लिंकाँमैं थेंब् भन्दा ओंसों, धै थे-थेबै कोंमैं बनेब् भन्दा ओंसोंन् ङ मुँल। 
खीजी पृथ्बी नेरो स युँमा, सिं धुँमैं बनेब् भन्दा ओंसोंन ङ मुल। 
खीजी पृथ्बीए फिर मु थेंमा, मा ङ्युँइए कारग्युले बार थोमा ङ चर्न मुँल। 
खीजी न्हाँम्स्योमैं मुर थेंमा, थेबै मा ङ्युँइर ह्‍याबै क्युए मुल्मैं त्होंमिंमा, 
क्युमैं खीजी बिब् भन्दा बैरु आह्‍यारिगे बिसि मा ङ्युँइर साँद थेंमा, खीजी पृथ्बीए जग झोंमा, 
सिपालु म्हि घ्रि धोंले ङ खीने मुँल। त्हिंइ ह्रोंसे ङ सैं तोंरिमल, खीए उँइँर ङ खोंयोंइन आनन्द तरिमल। 
खीजी बनेबै ह्‍युल म्रोंसि आनन्द तदै ताँन् म्हिमैंने ङ सैं तोंरिमल। 
“ओ ङए च्हमैं, तारे ङए ताँ थेद्; ङए घ्याँर प्रब्मैंइ आशिक योंब्मुँ। 
ङए अर्थि थेदु धै ह्रब्-सेब् तदु, च हेल आलद्। 
ङए ताँ थेबै म्हिइ आशिक योंम्, चइ त्हिं ह्रोंसे ङए म्राउँइँन ङ्‍होरिमुँ, धै ङए म्रार पैंरिम्। 
तलेबिस्याँ खाबइ ङलाइ त्होमुँ, चइ छ्ह योंम् धै याहवेहजी चए फिर ल्हयो खम्। 
दिलेया ङने त्होल् आम्हैबै म्हिइ ह्रोंसलाइन नास लम्; ङलाइ हेल लबै म्हिइ कालने म्हाँया लम्।” 
