﻿भजनमैं.
112.
याहवेहए मिं थेब लद्! याहवेहलाइ मान लब धै खीए ताँमैं सैं तोंदै म्हाँदिबै म्हिइ आशिक योंम्! 
चए सन्तान ह्‍युलर बेल्‍ले भोंब तब्मुँ; ठिक के लबै म्हिए सन्तानइ आशिक योंब्मुँ। 
चए धिंर सैन्होर तब्मुँ, धै चइ लबै ठिक केमैं खोंयोंन् बिलै तरिम्। 
सोजो म्हिमैंए ल्हागिर म्हुँइँसरै या ह्‍वे चारम्, चमैंइ दयाम्हाँया लम्, ल्हयो खम्, ठिक के लम्। 
सैं प्ल्हसि छे पिंब नेरो भर म्हाँदिल् खाँबै के लरिबै म्हिल बिब् धों मैंब् धों तम्। 
ठिक के लबै म्हि खोंयोंन् बिलै छ्याँबै घ्याँर प्रम्; छाबै म्हिलाइ खोंयोंन् बिलै मैंरिम्। 
आछ्याँबै ताँमैं थेमा च आङ्हिं; चइ याहवेहए फिर भर लबइले चए सैं भोंब मुँ। 
चए सैं भोंब मुँ, छतसि च आङ्हिं, लिउँइँ शत्तुरमैं हार्दियाब चइ म्रोंब्मुँ। 
आयोंब्-आख्युब्मैंलाइ चइ सैं प्ल्हसि पिंइमुँ; चइ लबै ठिक केमैं खोंयोंन् बिलै तरिम्; चलाइ ताँनइ मान लब्मुँ, धै चए क्र कैंडो तब्मुँ। 
दुष्‍ट म्हिमैंइ चु म्रोंसि ह्रिस लब्मुँ, धै स ह्रासि नास तयाब्मुँ; दुष्‍ट म्हिमैंल बिब् धों मैंब् धों आत। 
