﻿भजनमैं.
64.
क्वे प्रिंब्मैंए चिबए ल्हागिर दाऊदइ प्ह्रिबै भजन घ्रि। ओ परमेश्‍वर, ङइ ग्वार ह्रिमा ङए ताँ थेमिंन्, शत्तुरमैं म्रोंसि ङ ङ्हिंइमुँ, छतसि ङ जोगेमिंन्। 
ङए बिरोधर ङइ आसेल्‍ले दुष्‍टमैंइ लबै चाँजोमैं नेरो आछ्याँबै के लब्मैंइ ङए बिरोधर रोबै जालउँइँले ङलाइ लोथेंन्। 
सेलाँर धार झोंब् धोंले चमैंइ खेंमैंए लेर धार झोंमुँ, मे त्हँलेइ ल्हिब् धोंलेन् चमैंइ पोंबै ताँमैंइ म्हिए सैं नल् लम्। 
तोइ दोष आरेब्मैंलाज्यै या चमैंइ तो धोंइ आङ्हाँन्ले दोष ल्हैदिब्मुँ। छले आगुए फिर खैच्हिजिले पोंसेया चमैंए सैंर तोइ आङ्हाँ। 
आछ्याँबै केमैं लबर चमैंइ खें-खेंमैंए न्होंर घ्रिइ घ्रिलाइ भों पिंमुँ। खाबज्यै आसेल्‍ले ङो चुले बिसि चमैं क्ह्रिसि मत लमुँ। “ङ्योइ लबै चु के खाबइ म्रोंम्‌ रो?” बिसि चमैंइ बिम्। 
म्हिमैंए सैं कति आछ्याँब् तमना, चमैंइ आगुए न्होह्रों लबै जाल रोमुँ, दिलेया “ङिइ ठिक चाँजोमैं लइमुँ,” बिम्। 
दिलेया परमेश्‍वरजी चमैंए फिर मे त्हलेइ ल्हिब्मुँ, धै चमैं था आसेल्‍ले घायते तब्मुँ। 
चमैंइ पोंबै ताँ खेंमैंए फिर्न खीजी एखल् लब्मुँ, धै चमैं नास लवाब्मुँ। झाइले चमैंलाइ म्रोंम्मैं ताँनइ प्ह्रदै क्र लाब्मुँ। 
छतब् म्रोंसि ताँन् ह्रेंर्बै म्हिमैं ङ्हिंब्मुँ, चमैंइ परमेश्‍वरजी लबै केए बयन लब्मुँ, धै खीजी लबै केमैं छेनाले क्होल् म्हैब्मुँ। 
ठिक के लब्मैं याहवेहनेन् सैं तोंब्मुँ, धै खीए प्हलेर्न ग्वार योंम्। सोजो म्हिमैं ताँनइ खीए मिं थेब् लब्मुँ! 
