﻿मत्‌ती.
22.
ईसु अळी तीमने दाखला ह़मळाव्‌वा बाज ज्‌यो। तीहयो केदो, 
ह़रग नु राज तीहया राजा ह़रकु से, जे आह़फा ना सोरा ना वेवा मे पंगात बहाड़्‌यो। 
राजो आह़फा ना पावर्‌या ने नेवतु आपला माणहु ने बोलाव्‌वा करीन मोकल्‌यो, बाखीन तीहया आव्‌वा नी हींड्‌ता हता। 
राजो नेवतु आपला माणहुन तां अळी बीजा पावर्‌या ने आहयु केतो जाय्‌न मोकल्‌यो, “नेवतु आपला तीहया माणहु ने की देवो, देखो! मे मारी पंगात नु खाणु तीयार कर देदलो से। मारा बोळद्‌या अने पाळ्‌ळा जानवरु मराय नाखलो से। अने खाणु तीयार से; वेवा नी पंगात मे आवो।” 
पण तीहया आहयी वात पोर धीयान नी देदा। कानो आह़फा ना खेतर भणी जत र्‌यो, अने कानो आह़फा नु वेपारु करवा जत र्‌यो। 
अने काना माणहु तीहया राजा ना पावर्‌या ह़ाते वारु वेहवार नी कर्‌या अने तीमने मार नाख्‌या। 
आहयी वात ह़मळीन राजा ने घणी रीह लागी। अने तीहयो आह़फा ना सीपायड़ा मोकलीन तीहया हत्‌यारा ने मराय नाख्‌यो अने तीमना ह़ेर ने धपाड़ नाख्‌यो। 
अळतेण राजो आह़फा ना पावर्‌या ने केदो, “वेवा नी पंगात नी तीयारी ते हय जेली से, पण जीमने नेवतु आपलु हतु, तीहया आना लायक नी बण्‌या।” 
एतरे वाट ना चोवराया पोर जावो, अने जेतरा बी माणहु जड़ जाय, तीहया आखाम ने वेवा नी पंगात मे बोलाय लावो। 
अने पावर्‌या रोहा पोर ज्‌या, अने भला अने कुहर्‌या आखा माणहु ने बोलावीन ली आया अने वेवा नो घोर तीहया माणहु सी भराय ज्‌यु। 
राजो पोरणा ने देखवा करीन आयो, तां तीनी नींगा एक एसवा माणेह पोर पड़ी, जे वेवा ना लुगड़ा नी पेरलो हतो। 
तीहयो तीने केदो, भाय वेवा ना लुगड़ा पेर्‌या वगर तु आञे केम आय लाग्‌यो? तीहयो माणेह होगो हय र्‌यो। 
तत्‌यार राजो आह़फा ना पावर्‌या ने हुकम आपीन केदो, आना हात अने पोगु बांदीन आने बारथो अंदारला मे नाख देवो। तां तीहया माणहु रड़हे, अने दात ककड़ावहे। 
काहाके बोलावला ते ढेरेत से, पण टाळला थोड़ाक से। 
तीहयी टेमे फरीसी पंथवाळा जाय्‌न भेळा हय्‌न वीच्‌यार काड्‌या के कीसम ईसु ने हीनी वात मे फसाड़या। 
पण तीहयो आह़फा ना चेलाम ने हेरोद नी ह़ाते तीनीन्‌तां आहयु केवा मोकल्‌यो, “ए मास्‌तर आमु जाणया के तु खरलो से, अने भगवान नी वाट सच्‌चाय सी ह़ीकाड़े, अने कोय नी परवाय नी करत्‌लो, काहाके तु माणहु नु मोडु देखीन वात नी करत्‌लो। 
एतरे आमने देखाड़ तु ह़ु सोचे? केसर ने फाळो आपवा वारु से के नी हय।” 
ईसु तीमनी वात जाणीन केदो, “ए ढोंगड़ा करन्‌या, मने काहा पारखो? 
फाळा नो सीक्‌को मने देखाड़ो।” ता तीहया तीनीन्‌तां एक सीक्‌को लाया। 
तीहयो तीने पुछ्‌यो, “आहयो छाप अने नाम कोय नु से?” 
तीहया तीने केदा, “केसर नो।” तत्‌यार तीहयो तीने केदो, “जे केसर नु से, तीहयो केसर ने आपो; अने जे भगवान नु से, तीहयु भगवान ने आपो।” 
आहयु ह़मळीन तीहया घबराय ज्‌या, अने तीने रेवा दीन जत र्‌या। 
तीहया दाड़े सदुकी पंथवाळा जे केता हता के मरला नु पासु जीवणु हयेत नी, तीनी ह़ाते आया अने तीने पुछ्‌या, 
“ए मास्‌तर, मुसो केदलो हतो के कदी कोय माणेह वण-अवल्‌यात मर जाय, ता तीनो भाय तीनी लाडी सी वेवा करीन आह़फा ना भाय जुगु सोरा पयदा करे। 
हाव अमारीन्‌तां ह़ात भाय हता; पेलो वेवा करीन मर ज्‌यो, अने सोरा नी हयवा ना कारण आह़फा नी लाडी ने आह़फा ना भाय नी करते सोड़ ज्‌यो। 
आहयी रीते बीजो अने तीसरो बी कर्‌यो, अने ह़ातोव भाय लग आसमेत हयु। 
आखान बाद मे आखरी मे तीहयी बयर बी मर जी। 
एतरे पासा जीवता हयवा पोर तीहयी तीहया ह़ातोव भाय मे गेथी कोयनी लाडी हयहे? काहाके तीहयी आखा नी लाडी बणली हती।” 
ईसु तीमने जपाप आप्‌यो, “तमु चोखली सास्‌तर अने भगवान नी सक्‌ती ने नी जाणता; आना कारण सी भुल मे पड़ र्‌या। 
काहाके जीवता हयवा पोर वेवा नी हये पण ह़रग मे आखा ह़रगदुत ने तेम रेहे। 
पण मरला ने जीवता हयवा ना बारा मे ह़ु तमु आहयो बोल नी भण्‌या जे भगवान तमने केदो: 
‘मे अब्‌राहम नो भगवान, अने ईसाक नो भगवान, अने याकुब नो भगवान से?’ तीहयो मरला नो नी, पण जीवता नो भगवान से।” 
आहयु ह़मळीन माणहु तीनी ह़ीकापण सी घबराय ज्‌या। 
जत्‌यार फरीसी पंथवाळा आहयु ह़मळ्‌या के ईसु सदुकी ना मोडा बंद कर देदो, ता तीहया एखठा हया। 
तीमनी मे गेथु एक कायदा पाळवा वाळो तीने पारखवा नी करते तीने पुछ्‌यो, 
“ए मास्‌तर कायदा मे कानो हुकम आखा सी मोटो से?” 
तीहयो तीने केदो, “तु तारा मालीक ने अने भगवान ने पुरा मन अने आह़फा ना पुरा जीव अने आह़फा नी आखी अक्‌कल नी भेळ मोंग कर। 
आहयो आखा गेथो पेलो अने मोट्‌लो हुकम से। 
अने तीनीन तेम आहयो बीजो हुकम से के तु आपणा ह़ाते वाळा सी आह़फान तेम मोंग राख। 
आखा कायदा अने भगवान वगे गेथा केण्‌या माणहु ना कीताप्‌या आहयात बे हुकम पोर टेकला से।” 
जत्‌यार फरीसी पंथवाळा एखठा हता, ता ईसु तीमने पुछ्‌यो, 
“मसी ना बारा मे तमु ह़ु सोचो? तीहयो कोयनो सोरो से?” तीहया तीने केदा, “दावुद नो।” 
तीहयो तीने पुछ्‌यो, “ता दावुद आत्‌मा मे हय्‌न हीने मालीक ह़ुका केय? 
‘मालीक, मारा मालीक ने केदो, मारी जमणी ह़ोड़ बह, जत्‌यार लग मे तारा वेरी ने तारा पोगु तळे नी कर देम।’ 
भलु, जत्‌यार दावुद हीने मालीक केय, ता हीय्‌यो हीनो सोरो केम केवायो?” 
आना जपाप मे कोय बी एक वात नी की सक्‌यो। तीहया दाड़े गेथा कोयने अळतेण तीने कंय पुसवा नी हीम्‌मत नी हयी। 
